Wednesday, 4 September 2019

बारिश की साजिश

 दिलों को जोड़ने की है साजिश
बहुत दिनों बाद बरसी ऐसी बारिश

भीनी भीनी मुलायम सी सौगात
आँखों से ओझल ये सुन्दर एहसास

न बूँदें हैं न उनकी टिप टिप
कुदरत ने बुहारी ठंडी सी फ़ुहार

न उतार-चढ़ाव ना दिशा ना आवाज़
तन से अछूती प्रीत का आगाज़

 मासूम सा इसका भोलापन  
जगा रहा दीवानगी के जज़्बात

आसमान जुड़े ज़मीं के दिल से
ऐसी ताकत रखती अलख बौछार

कह रही कर लो अब विश्वास 
होगा इसी जन्म दोस्ती का एहसास

 Ever experienced a mild rain, a drizzle which cannot be seen but can only be felt! 
A nourishment to soul.